गोरखपुर: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एकतरफा प्यार का एक सनसनीखेज और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ एक युवती ने रेजिडेंट डॉक्टर के प्रति अपनी दीवानगी में नींद की गोलियां खाने के साथ-साथ कलाई की नस काटकर जान देने की कोशिश की। गनीमत रही कि पुलिस और मकान मालिक ने समय रहते उसे अस्पताल पहुँचाया, जहाँ सर्जरी के बाद उसकी जान बचा ली गई है।
आइसोलेशन की कमी से हायर सेंटर रेफर
खतरे से बाहर आने के बाद भी युवती की ‘प्यार’ पाने की जिद ने डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वह लगातार डॉक्टर से अकेले में मिलने की मांग कर रही है। मेडिकल कॉलेज मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. तपस आइच ने इसे गंभीर मानसिक विकार बताया है। चूँकि बीआरडी में मरीजों को एकांत में रखने की सुविधा नहीं है, इसलिए मजबूरी में उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है।
हितों के टकराव ने रोका विभाग में इलाज का रास्ता
मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि जिस डॉक्टर से युवती लगाव रखती है, वे खुद उसी मनोरोग विभाग में तैनात हैं। ‘हितों के टकराव’ के नैतिक संकट के कारण विभाग के अन्य डॉक्टर युवती का इलाज करने में असमर्थ हैं। उधर, घटना के चलते पीड़ित डॉक्टर और उनका पूरा परिवार गहरे अवसाद में चला गया है।
मां और बहन ने तोड़ा रिश्ता, पुलिस बनी सहारा
इस दुखद घटना का सबसे मानवीय पहलू यह है कि मुसीबत की घड़ी में परिवार ने युवती का साथ छोड़ दिया है। पिता का निधन पहले ही हो चुका था, अब मां और बड़ी बहन ने भी गोरखपुर आकर उसकी सुध लेने से साफ इनकार कर दिया है। फिलहाल पुलिस और मकान मालिक ही तीमारदार बनकर अस्पताल में उसकी देखभाल कर रहे हैं।