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Winter Heart Care: सर्दियों में बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा, एम्स गोरखपुर ने बताईं 10 जरूरी बातें

Winter Heart Care: सर्दियों में बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा, एम्स गोरखपुर ने बताईं 10 जरूरी बातें

सर्दी में थोड़ी सी सावधानी, बचा सकती है आपकी जान। एम्स गोरखपुर की सलाह मानें, दिल का ख्याल रखें।
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गोरखपुर: सर्दियों का मौसम आते ही दिल की सेहत का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है। कड़ाके की ठंड में जब हाथ-पैर सुन्न होने लगते हैं और हमारा मन सिर्फ रजाई में दुबके रहने का करता है, ठीक उसी समय हमारा हृदय हमसे ज्यादा देखभाल की उम्मीद करता है। ठंड के दिनों में हृदयाघात (Heart Attack) के मामले अक्सर बढ़ जाते हैं, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसी क्रम में रविवार को गोरखपुर एम्स (AIIMS Gorakhpur) की ओर से हृदय की देखभाल को लेकर एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई। इस सलाह पत्र में बताया गया है कि सर्दियों में, विशेषकर हृदय रोगियों और बुजुर्गों को अपनी दिनचर्या में क्या बदलाव करने चाहिए ताकि उनका दिल स्वस्थ और सुरक्षित रहे।

सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है दिल का खतरा?

एम्स द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, सर्दियों में ठंड के संपर्क में आने से शरीर अपनी गर्मी बचाने के लिए रक्त-वाहिकाओं (धमनियों) को सिकोड़ता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘वैसोकन्स्ट्रिक्शन’ (Vasoconstriction) कहते हैं। धमनियों के सिकुड़ने से अक्सर ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हृदय को ब्लड पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। कुछ परिस्थितियों में खून का थक्का बनने (Clotting) की संभावना भी बढ़ जाती है। यह स्थिति उन लोगों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है, जिन्हें पहले से कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, हार्ट फेल्योर या अनियंत्रित हाइपरटेंशन की समस्या है।

किन लोगों को है सबसे ज्यादा जोखिम?

एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि ठंड का सबसे ज्यादा असर किन लोगों पर पड़ता है:

  • जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है।
  • जो हाइपरटेंशन (High BP), डायबिटीज़ या किडनी रोग से ग्रसित हैं।
  • जिनका एंजाइना, हार्ट अटैक, स्टेंट या बायपास सर्जरी का इतिहास रहा हो।
  • हार्ट फेल्योर या धड़कन की गड़बड़ी (जैसे AF) के मरीज।
  • ऐसे लोग जो ठंडे घरों में रहते हैं, अकेले हैं या अपनी दवाएं अनियमित रूप से लेते हैं।

बचाव के 10 व्यावहारिक कदम जो डालते हैं बड़ा फर्क

गोरखपुर एम्स ने 10 ऐसे उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर सर्दियों में दिल की बीमारियों से बचा जा सकता है:

  1. खुद को गर्म रखें: यह किसी दवा जितना ही जरूरी है। घर का तापमान बहुत कम न होने दें। परतों (Layers) में कपड़े पहनें और सिर, कान व हाथ-पैर ढककर रखें। बाहर निकलते समय नाक-मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें ताकि ठंडी हवा का सीधा झटका न लगे।
  2. सुबह-शाम की ठंड से बचें: बहुत ज्यादा ठंड में बाहर के काम दोपहर या धूप निकलने पर ही करें। सुबह बहुत जल्दी या देर रात अचानक तेज चलने या भागने से बचें।
  3. भारी श्रम से रहें सावधान: ठंड में अचानक भारी मेहनत करना, जैसे भारी सामान उठाना या तेज चढ़ाई करना, ब्लड प्रेशर और दिल की ऑक्सीजन की जरूरत को तेजी से बढ़ा सकता है। इसलिए काम धीरे शुरू करें और बीच-बीच में ब्रेक लें।
  4. घर पर बीपी मॉनिटरिंग: सर्दियों में बीपी बढ़ने की प्रवृत्ति रहती है, इसे ‘विंटर सुपर-हैबिट’ बनाएं। सप्ताह में कई दिन बीपी चेक करें। अगर रीडिंग लगातार बढ़ी रहे, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
  5. दवाओं में सावधानी: सर्दी-जुकाम की कुछ ओटीसी (OTC) दवाएं (जैसे डिकंजेस्टेंट) बीपी बढ़ा सकती हैं। हार्ट पेशेंट्स इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
  6. इनडोर व्यायाम जारी रखें: बाहर ठंड है तो घर के अंदर ही 20-30 मिनट वॉक, हल्का स्ट्रेच या योग करें। व्यायाम शुरू करने से पहले 5-10 मिनट वॉर्म-अप जरूर करें।
  7. डाइट और स्मार्ट थाली: सर्दियों में अचार, नमकीन और पैकेट बंद सूप का सेवन कम करें क्योंकि इनमें छिपा हुआ नमक बीपी बढ़ा सकता है। थाली में सब्जियां, फल, दाल और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएं।
  8. पानी पिएं: सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन कम पानी पीने से खून गाढ़ा हो सकता है जिससे क्लॉट का खतरा बढ़ता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लें।
  9. फ्लू को हल्का न लें: श्वसन संक्रमण या फ्लू हृदय पर तनाव बढ़ा सकता है। उच्च जोखिम वाले मरीज डॉक्टर से इन्फ्लुएंजा वैक्सीन पर चर्चा जरूर करें।
  10. वजन पर नजर रखें: हार्ट फेल्योर के मरीज अपना रोज वजन चेक करें। अगर 2-3 दिन में अचानक वजन बढ़ता है या पैरों में सूजन आती है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।

हार्ट अटैक के लक्षण और क्या करें?

एडवाइजरी में बताया गया है कि ठंड में ‘स्ट्रेस रिस्पॉन्स’ बढ़ने और धमनियों के सिकुड़ने से हार्ट अटैक का खतरा रहता है। इलाज समय पर मिलना सबसे प्रभावी होता है। यदि सीने में दबाव या दर्द हो, सांस फूले, ठंडा पसीना आए, या दर्द जबड़े, बाएं हाथ व पीठ की तरफ फैले, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या अस्पताल पहुंचें। अस्पताल में एंजियोप्लास्टी या क्लॉट घोलने की दवा से ब्लड फ्लो को जल्द से जल्द बहाल किया जाता है।

सावधानीविवरण
🌡️ तापमानघर को गर्म रखें, बाहर निकलने पर नाक-मुंह ढकें।
🏃 व्यायामसुबह की कड़ाके की ठंड में बाहर न टहलें, घर के अंदर (Indoor) व्यायाम करें।
🥗 खान-पाननमक, अचार और प्रोसेस्ड फूड से बचें। हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाएं।
💊 दवाइयांडॉक्टर की सलाह के बिना सर्दी-जुकाम की OTC दवाएं न लें।
🩺 मॉनिटरिंगहफ्ते में कई बार घर पर BP चेक करें, हार्ट फेल्योर मरीज रोज वजन तोलें।
⚠️ रेड अलर्टसीने में दर्द, सांस फूलना या ठंडा पसीना आने पर तुरंत इमरजेंसी में जाएं।

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Priya Srivastava

Priya Srivastava

About Author

Priya Srivastava दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में परास्नातक हैं. गोगोरखपुर.कॉम के लिए इवेंट, एजुकेशन, कल्चर, रिलीजन जैसे टॉपिक कवर करती हैं. 'लिव ऐंड लेट अदर्स लिव' की फिलॉसफी में गहरा यकीन.

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