गोरखपुर: इस्लामी कैलेंडर के मुकद्दस महीने शाबान के चांद को लेकर चल रहा इंतजार खत्म हो गया है। सोमवार की शाम गोरखपुर समेत पूरे देश में कहीं भी शाबान का चांद नजर नहीं आया। मरकजी चांद कमेटियों और उलेमाओं ने तस्दीक की है कि अब शाबान माह की शुरुआत बुधवार, 21 जनवरी से होगी। चांद की इस गवाही के बाद यह तय हो गया है कि शब-ए-बरात (Shab-e-Barat) का पर्व 3 फरवरी, मंगलवार को पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाएगा।
शाबान की 15वीं तारीख की रात होगी इबादत की खास रात
इस्लामी कैलेंडर के गणित के मुताबिक, शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात को शब-ए-बरात के तौर पर मनाया जाता है। हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि यह दीन-ए-इस्लाम का 8वां महीना है और रूहानी तौर पर बहुत मुबारक माना जाता है। चूंकि सोमवार को चांद नहीं दिखा, इसलिए मंगलवार को रजब महीने की 30 तारीख पूरी की जाएगी। बुधवार को शाबान की पहली तारीख होगी, जिसके हिसाब से 15वीं रात 3 फरवरी को पड़ेगी। यह महीना इसलिए भी अहम है क्योंकि इसके खत्म होते ही बरकतों वाला महीना माह-ए-रमजान शुरू हो जाता है।
‘निजात की रात’ का मतलब है गुनाहों से छुटकारे का पर्व
कारी मुहम्मद अनस रजवी ने इस त्योहार की रूहानी अहमियत और इसके शाब्दिक अर्थ पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि शब-ए-बरात का मतलब ‘छुटकारे की रात’ या ‘निजात की रात’ होता है। इस रात अल्लाह की विशेष रहमत बरसती है। इसी अकीदत के साथ मुस्लिम समुदाय के लोग इस रात कब्रिस्तानों का रुख करते हैं। वहां जाकर अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढ़ते हैं और उनकी बख्शिश (मुक्ति) की दुआ मांगते हैं। इसके अलावा वलियों की दरगाहों पर जियारत का सिलसिला भी पूरी रात चलता रहता है।
हलवे की मिठास के ठीक 15 दिन बाद शुरू होगा रमजान
शब-ए-बरात केवल इबादत ही नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और दान का भी पर्व है। मौलाना महमूद रजा कादरी ने बताया कि इस दिन घरों में खास तौर पर सूजी, चने की दाल और गरी का हलवा व अन्य लजीज पकवान पकाए जाते हैं, जिन्हें गरीबों में बांटा जाता है। महानगर की मस्जिदों और कब्रिस्तानों में साफ-सफाई और रोशनी की सजावट शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस रात के ठीक 14 या 15 दिन बाद मुसलमानों का सबसे पवित्र महीना रमजान शुरू हो जाता है, इसलिए इसे रमजान की आमद का संकेत भी माना जाता है।