इवेंट

गोरखपुर में ‘कउड़ा पर जुटान’: रीना त्रिपाठी बोलीं- भोजपुरी बोलना माँ के पैर छूने जैसा

गोरखपुर में 'कउड़ा पर जुटान': रीना त्रिपाठी बोलीं- भोजपुरी बोलना माँ के पैर छूने जैसा

गोरखपुर: गोरखपुर की कड़कड़ाती ठंड में रविवार को भोजपुरी भाषा की गर्मी महसूस की गई। ‘गोरखपुरिया भोजपुरिया परिवार’ द्वारा नेपाल लॉज में आयोजित ‘कउड़ा पर जुटान’ कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजनों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी लोकसंस्कृति को सहेजने का बीड़ा उठाया। इस दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अपनी बोली को भूलना अपनी जड़ों से कटने जैसा है।

मातृभाषा का सम्मान माँ के चरण स्पर्श के समान

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता और गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय की संरक्षिका रीना त्रिपाठी ने बेहद भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि भोजपुरी हमारी छूटी हुई भाषा है और इसे त्यागने पर यह धीरे-धीरे मरने लगती है। उन्होंने ‘कउड़ा पर जुटान’ जैसे आयोजनों को संजीवनी बताते हुए कहा कि अपनी मातृभाषा का सम्मान करना अपनी सगी माँ के चरण स्पर्श करने जैसा पवित्र कार्य है।

गोरखपुर में 'कउड़ा पर जुटान': रीना त्रिपाठी बोलीं- भोजपुरी बोलना माँ के पैर छूने जैसा
गोरखपुरिया भोजपुरिया परिवार’ द्वारा नेपाल लॉज में आयोजित ‘कउड़ा पर जुटान’ कार्यक्रम. फोटो: गो

भोजपुरी केवल भाषा नहीं, हमारी सांस्कृतिक पहचान

नरसा संरक्षक डॉ. संजयन त्रिपाठी ने इस बात पर जोर दिया कि भोजपुरी महज संवाद का जरिया नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता और विरासत है। वहीं, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ए. के. पाण्डेय ने कड़वी सच्चाई बयां करते हुए कहा कि हम अपनी ही बोली बोलने में संकोच करते हैं। उन्होंने चेताया कि जब तक हम अपने घरों के भीतर भोजपुरी नहीं अपनाएंगे, बाहरी मंचों के भाषण बेअसर रहेंगे।

भाषा के वैज्ञानिक शोध और प्रलेखन की नई पहल

संस्थापक विकास श्रीवास्तव ने संगठन की रिपोर्ट पेश करते हुए एक नया दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि अब केवल भावनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि भोजपुरी के संरक्षण के लिए भाषा-विज्ञान, शोध और प्रलेखन (Documentation) की सख्त जरूरत है। सह-संस्थापक नरेंद्र मिश्र ने घोषणा की कि भविष्य में लोककला और संगीत पर आधारित विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।


हमें फॉलो करें

Priya Srivastava

Priya Srivastava

About Author

Priya Srivastava दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में परास्नातक हैं. गोगोरखपुर.कॉम के लिए इवेंट, एजुकेशन, कल्चर, रिलीजन जैसे टॉपिक कवर करती हैं. 'लिव ऐंड लेट अदर्स लिव' की फिलॉसफी में गहरा यकीन.

नया एक्सप्रेसवे: पूर्वांचल का लक, डेवलपमेंट का लिंक महाकुंभ 2025: कुछ अनजाने तथ्य… महाकुंभ 2025: कहानी कुंभ मेले की…
नया एक्सप्रेसवे: पूर्वांचल का लक, डेवलपमेंट का लिंक