गोरखपुर: सनातन परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक महापर्व मकर संक्रांति के अवसर पर गुरुवार को श्री गोरखनाथ मंदिर में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। शिवावतारी महायोगी गुरु गोरखनाथ जी को श्रद्धा की ‘पावन खिचड़ी’ अर्पित करने के लिए तड़के से ही लंबी कतारें देखी गईं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आज रिकॉर्ड 25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर में मत्था टेककर गुरु गोरखनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर पूरा मंदिर परिसर ‘जय गोरखनाथ’ के जयघोष से गुंजायमान रहा।
अटूट श्रद्धा के साथ 25 लाख भक्तों ने अर्पित की खिचड़ी
मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर गोरखपुर और आसपास के जिलों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल से भी भारी संख्या में भक्त गोरक्षपीठ पहुंचे। श्रद्धालुओं ने कड़ाके की ठंड के बावजूद पूरी आस्था के साथ गुरु गोरखनाथ को अपनी पारंपरिक खिचड़ी भेंट की। श्रद्धालुओं की यह भारी संख्या सनातन संस्कृति के प्रति अटूट विश्वास और सामाजिक समरसता के उस सुंदर स्वरूप को दर्शाती है, जहां हर वर्ग के लोग एक साथ मिलकर इस लोक पर्व को मनाते हैं।
सनातन की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक समरसता एवं सामाजिक एकता के प्रतीक पावन पर्व मकर संक्रांति (खिचड़ी) के अवसर पर आज श्री @GorakhnathMndr में 25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने शिवावतारी महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ जी को श्रद्धा एवं आस्था की पावन खिचड़ी अर्पित की, सभी का हार्दिक अभिनंदन!… pic.twitter.com/AIbjcDZhJ5
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 15, 2026
प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच दिखा सटीक समन्वय
इतनी विशाल भीड़ को नियंत्रित करने और आयोजन को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की थी। नगर निगम गोरखपुर के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी इस महापर्व के सफल आयोजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह सहायता केंद्र और पेयजल की व्यवस्था की गई थी, जिससे दर्शनार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
स्वयंसेवकों के निस्वार्थ सेवा भाव ने पेश की मिसाल
इस महापर्व के सफल संचालन में सुरक्षा बलों के साथ-साथ सैकड़ों स्वयंसेवकों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। मंदिर प्रबंधन ने पुलिस प्रशासन, नगर निगम और सभी स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें ‘साधुवाद’ दिया है। इन कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का ही परिणाम रहा कि 25 लाख की भारी भीड़ होने के बावजूद संपूर्ण कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ, जो प्रबंधन और सामाजिक एकता की एक बड़ी मिसाल बनकर उभरा है।