गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा प्रकाशित ‘भारत बौद्धिक्स’ श्रृंखला की 21 पुस्तकों का भव्य विमोचन करते हुए उन्होंने कहा कि यह श्रृंखला भारत की प्राचीन वैज्ञानिक दृष्टि और बौद्धिक विरासत का मार्ग प्रशस्त करेगी।
भारतीय ज्ञान परंपरा: आरोग्य से लेकर वैदिक गणित तक का संगम
विमोचित की गई इस श्रृंखला में कुल 21 पुस्तकें शामिल हैं, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। ये ग्रंथ मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित हैं:
- भारतीय काल दर्शन और प्राचीन इतिहास।
- भारतीय आरोग्य ज्ञान (आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा)।
- वैदिक गणित की गणना पद्धतियां।
- भारतीय भाषा विज्ञान और ज्ञान प्रणाली।
प्रो. पूनम टंडन ने जोर देकर कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा न केवल समृद्ध है, बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक और लोककल्याणकारी भी है। इन पुस्तकों के माध्यम से आधुनिक शोधार्थियों को प्राचीन भारत की वैज्ञानिक समझ से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
डीडीयू का स्वर्णिम वर्ष: नेचर इंडेक्स रैंकिंग में यूपी में नंबर वन, हीरक जयंती पर उपलब्धियों की झड़ी
‘भारत बौद्धिक्स’ राष्ट्रीय परीक्षा: जीतें 1 लाख रुपये तक का पुरस्कार
विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा इस श्रृंखला के आधार पर एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का भी आयोजन किया जा रहा है। परीक्षा की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
| परीक्षा की तिथि | 31 जनवरी एवं 1 फरवरी |
| पंजीकरण की अंतिम तिथि | 10 जनवरी |
| परीक्षा मोड | ऑफलाइन (विश्वविद्यालय परिसर में) |
| कुल अंक | 100 (80 बहुविकल्पीय + 20 वर्णनात्मक) |
| पात्रता | स्नातक (UG) एवं स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थी |
विजेताओं के लिए आकर्षक नकद पुरस्कार
विद्या भारती गोरक्ष प्रान्त के उपाध्यक्ष प्रो. अजय शुक्ला ने बताया कि इस परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा:
- प्रथम पुरस्कार: ₹1,00,000 (एक लाख रुपये)
- द्वितीय पुरस्कार: ₹50,000 (पचास हजार रुपये)
- तृतीय पुरस्कार: ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये)
- चतुर्थ पुरस्कार: ₹2,500 एवं प्रमाणपत्र
कार्यक्रम में विद्या भारती गोरक्ष प्रान्त की अध्यक्ष प्रो. ममता मणि त्रिपाठी ने कुलपति का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रो. अजय शुक्ला, प्रो. अनुभूति दुबे, प्रो. हिमांशु पाण्डेय और डॉ. चंद्र प्रकाश सिंह समेत कई गणमान्य शिक्षाविद उपस्थित रहे।