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गोरखपुर: निजी अस्पताल के इलाज से पेट में हुए थे 6 छेद, BRD के डॉक्टरों ने 17 यूनिट खून और इलाज से बचाया

बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर

गोरखपुर: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने मानवता और सेवा की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने एक 14 वर्षीय किशोरी को मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया। निजी अस्पताल की गलत सर्जरी के कारण अत्यंत गंभीर स्थिति में पहुँची काजल को डॉक्टरों ने न केवल जटिल ऑपरेशनों से बचाया, बल्कि उसे अपना 10 यूनिट खून भी दान किया।

निजी अस्पताल की गलत सर्जरी से पेट में हुए थे 6 छेद

बिछिया निवासी प्रमोद की पुत्री काजल को पेट दर्द के बाद एक निजी अस्पताल में गलत तरीके से ऑपरेट किया गया था, जिससे उसके पेट में 6 छेद (फिस्टुला) हो गए और मल बाहर आने लगा। बीआरडी के प्रोफेसर डॉ. अशोक यादव ने जांच में पाया कि बच्ची वास्तव में ‘आंत की टीबी’ से पीड़ित थी।

डॉक्टरों ने खुद रक्तदान कर बच्ची को दिया 10 यूनिट जीवनदायी खून

एक साल चले इस लंबे इलाज के दौरान काजल को कुल 17 यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी। ब्लड बैंक से सात यूनिट की व्यवस्था हुई, लेकिन शेष 10 यूनिट खून के लिए सर्जरी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों और फैकल्टी सदस्यों ने खुद आगे आकर अपना रक्तदान किया, ताकि एनीमिया से जूझ रही बच्ची की सर्जरी हो सके।

निशुल्क मिला 6 लाख का टीपीएन और एल्बुमिन, तीन चरणों में हुई जटिल सर्जरी

सामान्य भोजन लेने में असमर्थ काजल को 40 टीपीएन और 40 एल्बुमिन चढ़ाए गए, जिनकी बाजार में कीमत करीब 6 लाख रुपये है, लेकिन बीआरडी में यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क मिली। तीन बड़े ऑपरेशनों के बाद काजल के पेट के सभी छेद बंद हो गए हैं और वह अब पूरी तरह स्वस्थ है।


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Priya Srivastava

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Priya Srivastava दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में परास्नातक हैं. गोगोरखपुर.कॉम के लिए इवेंट, एजुकेशन, कल्चर, रिलीजन जैसे टॉपिक कवर करती हैं. 'लिव ऐंड लेट अदर्स लिव' की फिलॉसफी में गहरा यकीन.

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