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एम्स गोरखपुर का बड़ा फैसला, ₹200 तक के सभी लैब टेस्ट अब मुफ्त, जानिए नई दरें

एम्स गोरखपुर का बड़ा फैसला, ₹200 तक के सभी लैब टेस्ट अब मुफ्त, जानिए नई दरें

गोरखपुर: एम्स गोरखपुर ने मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत देते हुए अपनी सभी प्रमुख लैब सेवाओं को अब ‘इन-हाउस’ करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम के निर्देश पर अगले 3-4 दिनों में ये सभी सेवाएँ बाहरी एजेंसी हिंदलैब (Hindlab) से हटाकर संस्थान के बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी विभागों के सीधे नियंत्रण में आ जाएंगी।

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इस बड़े बदलाव का सबसे सीधा और महत्वपूर्ण लाभ यह होगा कि अब एम्स में ₹200 तक के सभी आवश्यक डायग्नोस्टिक टेस्ट पूरी तरह निःशुल्क किए जाएंगे, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सीधे तौर पर बड़ी मदद मिलेगी। यह पहल एम्स गोरखपुर की ओर से पूर्वांचल और आसपास के क्षेत्रों को सस्ती, विश्वसनीय और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

इन-हाउस मॉडल से जाँच शुल्क में भारी कमी

इस नए इन-हाउस मॉडल के तहत, न केवल ₹200 तक के टेस्ट मुफ्त होंगे, बल्कि ₹200 से अधिक लागत वाले अन्य सभी टेस्टों की दरों में भी उल्लेखनीय कटौती की जाएगी। एम्स प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि ये नई दरें वर्तमान में हिंदलैब द्वारा लिए जा रहे शुल्कों से काफी कम होंगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाओं को आम जनता के लिए अधिक किफायती और सुलभ बनाना है। मरीजों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए यह फैसला एक मील का पत्थर साबित होगा।

पारदर्शिता और बेहतर समन्वय पर जोर

एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम ने इस निर्णय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन-हाउस लैब मॉडल से सेवाओं की गुणवत्ता और समन्वय बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम संस्थान में एक अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ और एकीकृत डायग्नोस्टिक प्रणाली स्थापित करने की दिशा में आवश्यक है। इस मॉडल से सिर्फ मरीजों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि यह एम्स के छात्रों और रेज़िडेंट्स के लिए भी उत्कृष्ट सीखने और प्रशिक्षण का मंच बनेगा।

पूर्वांचल के लिए उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ

एम्स गोरखपुर का यह फैसला पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के मानक को ऊपर उठाने के लिए संस्थान के मूल लक्ष्य को दर्शाता है। लैब सेवाओं का इन-हाउस होना न केवल लागत को कम करेगा, बल्कि जाँच परिणामों की सटीकता और गति को भी बढ़ाएगा। बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग अब सीधे इन सेवाओं का संचालन करेंगे, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित होगा। यह पहल एम्स को एक मजबूत और एकीकृत डायग्नोस्टिक हब के रूप में स्थापित करेगी।


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Priya Srivastava

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About Author

Priya Srivastava दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में परास्नातक हैं. गोगोरखपुर.कॉम के लिए इवेंट, एजुकेशन, कल्चर, रिलीजन जैसे टॉपिक कवर करती हैं. 'लिव ऐंड लेट अदर्स लिव' की फिलॉसफी में गहरा यकीन.

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