गोरखपुर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा आज सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के तहत विशाल जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। इसमें विशेषज्ञों ने कैंसर की रोकथाम, शीघ्र पहचान और टीकाकरण को महिलाओं के जीवन की रक्षा के लिए अनिवार्य बताया। कार्यक्रम में कैंसर के लक्षण, बचाव के तरीके और नियमित जांच पर विशेष जोर दिया गया ताकि समय रहते इस बीमारी को मात दी जा सके।
भारत में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर
विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शिखा सेठ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं को होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। राहत की बात यह है कि यह बड़े स्तर पर रोकथाम योग्य है। उन्होंने प्रोटोकॉल साझा करते हुए कहा कि 25 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार स्क्रीनिंग अवश्य करानी चाहिए, जिससे रोग की पहचान शुरुआती चरण में हो सके।
9 से 21 वर्ष की आयु में एचपीवी टीकाकरण सबसे प्रभावी
डॉ. प्रियंका सिंह ने कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि 9 से 21 वर्ष की उम्र में एचपीवी (HPV) टीकाकरण बेटियों को सुरक्षित रखने का सबसे कारगर उपाय है। वहीं, डॉ. जागृति और डॉ. सौम्या ने ‘पैप टेस्ट’ के बारे में भ्रांतियां दूर करते हुए बताया कि यह एक बेहद सरल जांच प्रक्रिया है, जिसमें केवल कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन यह सर्वाइकल कैंसर से बचाव में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।
नुक्कड़ नाटक से दिया संदेश
नर्सिंग ऑफिसर अंकिता ने चेतावनी दी कि असामान्य योनि रक्तस्राव या रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद होने वाले रक्तस्राव को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने जननांग स्वच्छता बनाए रखने की भी अपील की। इस दौरान नर्सिंग छात्रों ने एक प्रभावी नुक्कड़ नाटक के जरिए शीघ्र स्वास्थ्य सेवा लेने का संदेश दिया। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र में महिलाओं ने अपनी शंकाओं का समाधान किया, जिससे कार्यक्रम के उद्देश्य सफल रहे।