गोरखपुर: राजकीय रेलवे पुलिस ने मंगलवार सुबह गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने स्टेशन परिसर में स्थित ऐतिहासिक भांप इंजन के पास से गिरोह के सरगना सहित दो तस्करों को दबोचा। तलाशी के दौरान इनके कब्जे से विभिन्न कंपनियों के 81 चोरी के मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी जा रही है। एसपी रेलवे लक्ष्मी निवास मिश्र के अनुसार, यह गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों से मोबाइल चोरी कर उन्हें नेपाल के बाजारों में खपाने का काम करता था।
जालंधर का सरगना और संतकबीरनगर का साथी गिरफ्तार
जीआरपी की गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान संदीप आहुजा और पंकज सैनी के रूप में हुई है। संदीप आहुजा पंजाब के जालंधर (डिवीजन चार) का निवासी है और इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड है, जिसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसका दूसरा साथी पंकज सैनी उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के धनघटा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। ये दोनों आरोपी रेलवे स्टेशन के पास किसी बड़े सौदे की फिराक में थे, तभी जीआरपी प्रभारी अनुज सिंह के नेतृत्व वाली टीम ने इन्हें घेराबंदी कर पकड़ लिया।
पंजाब से मोबाइल चोरी कर नेपाल में ऊंचे दाम पर बिक्री
गिरोह के काम करने का तरीका बेहद पेशेवर था। सरगना संदीप आहुजा पंजाब और देश के अन्य हिस्सों से चोरी किए गए महंगे स्मार्टफोन को इकट्ठा करता था। इसके बाद इन मोबाइलों को सुरक्षित रूट के जरिए गोरखपुर लाया जाता था, जहां से इन्हें सीमा पार नेपाल ले जाकर ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। नेपाल में भारतीय मोबाइल फोन की मांग और वहां पुलिस की पहुंच कम होने के कारण यह गिरोह लंबे समय से सुरक्षित तरीके से तस्करी का नेटवर्क चला रहा था।
बिहार के रितिक से मिला था 30 लाख की रिकवरी का सुराग
इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने में 23 दिसंबर 2025 को हुई एक पुरानी गिरफ्तारी ने अहम भूमिका निभाई। उस समय जीआरपी ने सीतामढ़ी (बिहार) के रहने वाले रितिक जायसवाल को 54 मोबाइल फोन (कीमत 15 लाख रुपये) के साथ पकड़ा था। रितिक ने ही कड़ाई से पूछताछ में संदीप आहुजा और उसके सिंडिकेट के बारे में जानकारी साझा की थी। फिलहाल, पुलिस अब बरामद हुए 81 मोबाइल फोनों के आईएमईआई नंबर के जरिए उनके वास्तविक मालिकों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कर रही है।