गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में संवेदनहीनता और कुप्रबंधन की सारी हदें पार हो गईं। यहां इलाज के लिए आए एक 10 वर्षीय घायल मासूम को न तो स्ट्रेचर मिला और न ही बेड। संसाधनों के अभाव में फर्श पर बैठकर इलाज हुआ और ड्रिप स्टैंड न होने पर दीवार की खूंटी का सहारा लेना पड़ा।
गोद में मासूम को लेकर भटकते रहे बेबस परिजन
जंगल धूसड़ के टोला रेतवहिया निवासी लल्लन का 10 वर्षीय पुत्र राज साइकिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजन उसे तत्काल बीआरडी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें न तो स्ट्रेचर मिला और न ही व्हीलचेयर। दर्द से तड़पते बच्चे को परिजन अपने हाथों में उठाकर इमरजेंसी ऑर्थो ओटी तक ले जाने को मजबूर हुए।
इमरजेंसी ओटी के बाहर फर्श पर बैठकर हुआ राज का उपचार
अस्पताल की अव्यवस्था यहीं नहीं थमी; ऑर्थो ओटी के बाहर घायल बच्चे को बेड के बजाय ठंडे फर्श पर बैठा दिया गया। हद तो तब हो गई जब बच्चे को ड्रिप चढ़ाने के लिए स्टैंड तक नसीब नहीं हुआ। मजबूर परिजनों ने दीवार पर लगी एक खूंटी (Peg) में ड्रिप की बोतल टांगकर बच्चे को ग्लूकोज चढ़ाया, जबकि बच्चा दर्द से कराहता रहा।
प्राचार्य का दावा: अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं, दोषियों पर होगी कार्रवाई
इस शर्मनाक घटना पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने अस्पताल में ड्रिप स्टैंड, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच की जाएगी और यदि कोई स्टाफ दोषी पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।