गोरखपुर: पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं और कोहरे की मोटी चादर ने गोरखपुर में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बिगड़ते मौसम और जानलेवा ठंड को देखते हुए अब जिले में स्कूल और कॉलेजों को बंद करने की मांग तेज हो गई है। राष्ट्रीय सेवा परिषद एवं डॉक्टर अशोक कुमार श्रीवास्तव फैंस एसोसिएशन ने प्रशासन से अपील की है कि बच्चों और युवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शिक्षण संस्थानों में तत्काल अवकाश घोषित किया जाए।
लगातार तीन दिनों से ओस की बारिश जैसा खतरनाक माहौल
संगठन के संयोजक मंजीत कुमार श्रीवास्तव ‘बाबू’ ने मौसम की भयावहता पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में गलन इतनी बढ़ गई है कि ओस की बारिश जैसा अहसास हो रहा है। हाड़ कंपा देने वाली ठंडी हवाओं के बीच सुबह के समय छोटे बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा है, जिससे अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
निमोनिया और सांस की बीमारियों का बढ़ा गंभीर खतरा
ठंड के इस प्रचंड प्रकोप के कारण स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति पैदा होने का डर है। संयोजक ने चेतावनी दी है कि इस मौसम में बच्चों को सर्दी, खांसी, बुखार के अलावा निमोनिया और सांस संबंधी गंभीर बीमारियां जकड़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में स्कूल खुले रखना किसी अप्रिय घटना को न्योता देने जैसा है। प्रशासन को किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय समय रहते एहतियाती कदम उठाने चाहिए।
चौराहों पर अलाव और गरीबों के लिए कंबल की मांग
शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने के अलावा, संगठन ने सामाजिक सरोकार के तहत प्रशासन का ध्यान गरीबों की ओर भी खींचा है। मांग की गई है कि सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए। साथ ही, रैन बसेरों में सुविधाएं बढ़ाई जाएं और खुले आसमान के नीचे ठिठुर रहे बेसहारा लोगों को तत्काल कंबल उपलब्ध कराए जाएं, क्योंकि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना शासन की पहली जिम्मेदारी है।