गोरखपुर: शरद ऋतु (ठंड) के आगमन के साथ ही जोड़ों का दर्द या संधिवात से पीड़ित मरीजों की तकलीफें बढ़ गई हैं। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की ओपीडी में ऐसे रोगी परामर्श लेने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सकों ने इन रोगियों को मौसम के अनुकूल अपने आहार और जीवनशैली में बदलाव लाने की सलाह दी है। चिकित्सकों के अनुसार, गुड़, अदरक, लहसुन, हल्दी, गुग्गुल और त्रिफला जैसे प्राकृतिक तत्वों का सेवन जोड़ों का दर्द दूर करने में अत्यंत फायदेमंद होता है।
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आयुर्वेदिक उपाय: गुड़, अदरक, लहसुन और मेथी का इस्तेमाल
आयुष विश्वविद्यालय की डॉ. लक्ष्मी अग्निहोत्री ने बताया कि ठंड के मौसम में कुछ मामूली सावधानियां बरत कर भी संधिवात के रोगों से बचा जा सकता है। उन्होंने सलाह दी है कि गुड़ और अदरक का सेवन करने से जोड़ों के दर्द में काफी राहत मिलती है। इसी तरह, रसोन (लहसुन) और हल्दी का सेवन भी लाभकारी है। इसके अलावा, मेथी के बीज को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उसका लेप तैयार करके लगाने से भी दर्द में आराम मिलता है। ये सभी उपाय दर्द निवारक के रूप में काम करते हैं और आयुर्वेदिक नियमों पर आधारित हैं।
पंचकर्म थेरेपी और योग से दूर होगी तकलीफ
चिकित्सकों ने केवल आहार ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार लाने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि नियमित योग और व्यायाम करने से शरीर में लचीलापन आता है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे दर्द कम होता है। इसके साथ ही, गर्म पानी का सेवन करने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। तेल से मालिश करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और दर्द से राहत मिलती है। आयुष विश्वविद्यालय की ओपीडी में पंचकर्म थेरेपी लेने की सलाह भी दी जा रही है। चिकित्सकों का मानना है कि यदि रोगी आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाते हैं, तो शरद ऋतु में जोड़ों का दर्द या संधिवात से बचाव संभव है।