गोरखपुर: उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (UPRTOU), प्रयागराज ने सत्र जनवरी 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया का शंखनाद कर दिया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने इस प्रक्रिया का विधिवत शुभारंभ किया। छात्रों की सुविधा के लिए इस बार आवेदन प्रक्रिया को बेहद सरल और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाया गया है। यूजीसी की नई गाइडलाइन का पालन करते हुए, प्रवेश से पहले छात्रों को अपनी अपार आईडी (APAAR ID), एबीसी आईडी (ABC ID) और यूजीसी डेब आईडी बनाना अनिवार्य होगा। तकनीकी विशेषज्ञों ने यह सुनिश्चित किया है कि डिजिटल प्रक्रिया के दौरान छात्रों को फॉर्म भरने में कोई कठिनाई न हो।
स्नातक में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई
प्रवेश प्रभारी प्रो. जे.पी. यादव ने बताया कि इस सत्र में कुल 64 कार्यक्रमों में प्रवेश लिया जा रहा है। इनमें 24 परास्नातक, 6 स्नातक, 7 डिप्लोमा और 23 प्रमाण-पत्र कार्यक्रम शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि बदलते दौर को देखते हुए सभी स्नातक प्रोग्राम के द्वितीय वर्ष में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (Artificial Intelligence) आधारित स्किल कोर्स शुरू किया जा रहा है। इसके अलावा, जनवरी 2026 सत्र से संग्रहालय विज्ञान में डिप्लोमा, एम.ए. गृह विज्ञान और बीसीए (BCA) जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम भी पहली बार शामिल किए गए हैं।
NEP 2020 के तहत घर बैठे मिलेगी डिग्री
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनवरी 2026 सत्र के सभी प्रवेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप होंगे। कुलपति ने जोर देकर कहा कि डिजिटल क्रांति का लाभ उठाते हुए विश्वविद्यालय ने प्रवेश की व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन कर दी है। इसका उद्देश्य गुणात्मक उच्च शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है, चाहे वह सुदूर ग्रामीण क्षेत्र का छात्र हो या कामकाजी पेशेवर। मुक्त विश्वविद्यालय की यह पहल उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो नियमित कक्षाओं में जाने में असमर्थ हैं, लेकिन उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
गोरखपुर केंद्र पर सहायता पटल का शुभारंभ
प्रवेश प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए क्षेत्रीय केंद्र गोरखपुर के समन्वयक डॉ. प्रवीण कुमार ने सभी संबद्ध अध्ययन केंद्रों को तत्काल प्रभाव से काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। छात्रों की सुविधा के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए क्षेत्रीय केंद्र पर ‘शिक्षार्थी सहायता पटल’ (Student Help Desk) की स्थापना की गई है। यहां छात्र पाठ्यक्रमों और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पा सकते हैं। विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि किसी भी तकनीकी खामी के कारण कोई भी इच्छुक छात्र प्रवेश से वंचित न रहे।