गोरखपुर: जनपद के चौरी-चौरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ब्रह्मपुर में विश्व की पहली ‘श्री यदुधाम पीठ’ की स्थापना की जाएगी। गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता काली शंकर यदुवंशी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आधिकारिक ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इस पीठ के माध्यम से यदुवंशी समाज की पहचान, आत्मसम्मान और वैचारिक चेतना को एक नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा। यह पीठ समाज को एक सूत्र में पिरोने के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करेगी।
महाराज यदु के साथ सहस्रबाहु अर्जुन की प्रतिमाएं होंगी स्थापित
प्रस्तावित ‘श्री यदुधाम पीठ’ के परिसर में महाराज यदु की एक भव्य और विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जो इस केंद्र का मुख्य आकर्षण होगी। काली शंकर यदुवंशी ने जानकारी दी कि पीठ के भीतर केवल महाराज यदु ही नहीं, बल्कि श्री राधा-कृष्ण और भगवान सहस्रबाहु अर्जुन की प्रतिमाएं भी स्थापित करने का प्रस्ताव है। यह धार्मिक पहल समाज के उन गौरवशाली पूर्वजों को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश है, जिन्हें अब तक इतिहास और राजनीति के सीमित दायरों में ही सिमटकर रखा गया था।
राजनीतिक बंधनों से मुक्त होकर सामाजिक चेतना पर जोर
प्रेस वार्ता के दौरान काली शंकर ने स्पष्ट किया कि यदुवंशी समाज को किसी एक विशेष राजनीतिक दल, संस्था या परिवार से जोड़कर देखना सामाजिक रूप से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं समय के साथ बदल सकती हैं, लेकिन समाज की चेतना शाश्वत रहती है। इस पीठ का निर्माण समाज को किसी एक राजनीतिक खेमे में बांटने के बजाय, उन्हें अपनी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने के लिए किया जा रहा है, ताकि समाज अपनी स्वतंत्र पहचान को और अधिक मजबूती से महसूस कर सके।
ब्रह्मपुर से शुरू होगी पूर्वांचल की नई राजनीतिक घेराबंदी
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि श्री यदुधाम पीठ की स्थापना का यह ऐलान आने वाले चुनावों में क्षेत्रीय समीकरणों को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकता है। हालांकि काली शंकर ने इसे एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कदम बताया है, लेकिन इसके पीछे समाज को एकजुट करने की जो कवायद है, उसके गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। ब्रह्मपुर में इस पीठ की स्थापना के साथ ही अब पूर्वांचल की राजनीति में यदुवंशी वोट बैंक को लेकर एक नई बिसात बिछती नजर आ रही है।