गोरखपुर: पत्रकारिता और तकनीक के क्षेत्र में गोरखपुर का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। आज जब देश में सैटेलाइट चैनलों की बाढ़ है, तब बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि भारत के पहले निजी सैटेलाइट चैनल ‘ज़ी न्यूज़’ की शुरुआत से करीब 6 साल पहले ही गोरखपुर में ‘न्यूजनेट’ (Newsnet) नाम की वीडियो मैगजीन तहलका मचा रही थी। 26 जनवरी 1993 को बीबीसी के तत्कालीन भारत ब्यूरो प्रमुख पद्मभूषण मार्क टली ने इस अनूठी मासिक वीडियो मैगजीन के पहले अंक का विमोचन किया था। यह प्रयोग उस दौर में हुआ था जब केबल नेटवर्क अपनी शुरुआती अवस्था में था।
प्रयोगधर्मी युवाओं की टोली ने रचा था इतिहास
इस ऐतिहासिक विजुअल मैगजीन की नींव गोरखपुर के कुछ बेहद रचनात्मक और प्रयोगधर्मी युवाओं ने रखी थी। उत्कर्ष कुमार, तुषार शंकर, शरद किसलय, कुमार हर्ष और राजेश श्रीवास्तव जैसे युवाओं की इस टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद वीडियो पत्रकारिता का ऐसा मॉडल पेश किया जो समय से बहुत आगे था। न्यूजनेट के माध्यम से शहर की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को विजुअल फॉर्मेट में जनता तक पहुंचाया जाता था। इस टीम ने उस दौर में वीडियो एडिटिंग और रिपोर्टिंग की बारीकियों को स्थानीय स्तर पर जीवंत किया था।
प्रशासन से स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट के बाद होता था प्रसारण
न्यूजनेट की विश्वसनीयता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह केवल एक अनौपचारिक वीडियो नहीं था, बल्कि पूरी तरह व्यवस्थित माध्यम था। हर अंक के प्रदर्शन से पहले जिला प्रशासन से बकायदा ‘स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट’ प्राप्त किया जाता था। इसके बाद ही शहर के विभिन्न मोहल्लों में बिछे केबल नेटवर्क के जरिए इसका प्रसारण होता था। केबल ऑपरेटरों के साथ समन्वय बिठाकर घर-घर तक खबरें पहुंचाने का यह मॉडल देश के कई बड़े मीडिया हाउसों के लिए बाद में प्रेरणा बना।
चुनाव विश्लेषण के विशेष एपिसोड को मिली थी सराहना
न्यूजनेट की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका ‘चुनाव विश्लेषण’ आधारित विशेष एपिसोड रहा। विधानसभा चुनावों के दौरान तैयार किए गए इस अंक में शहर के तत्कालीन वरिष्ठ पत्रकारों ने गहन विश्लेषण और भविष्यवाणियां पेश की थीं। स्थानीय मुद्दों पर आधारित इस बेबाक पत्रकारिता को जनता ने हाथों-हाथ लिया और इसे व्यापक सराहना मिली। पत्रकारिता के इतिहास में न्यूजनेट का नाम एक ऐसे मील के पत्थर के रूप में दर्ज है, जिसने मुख्यधारा के टीवी मीडिया के आने से पहले ही डिजिटल पत्रकारिता की नींव रख दी थी।