गोरखपुर: गोरखपुर के चौरीचौरा क्षेत्र के अयोध्याचक गांव के एक परिवार के लिए गुरुवार का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया। यहां से बीते छह वर्षों से लापता बंटी पांडेय (45) को गाजीपुर जिले से सकुशल बरामद कर लिया गया है। बंटी की लोकेशन बुधवार को गाजीपुर के खानपुर थाने में मिली थी, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। पुलिस की सूचना पर गांव के जिम्मेदार नागरिकों ने तत्परता दिखाई और कानूनी औपचारिकताओं के बाद उन्हें वापस उनके घर ले आए। इतने लंबे समय बाद घर के सदस्य की वापसी से परिजनों और ग्रामीणों में राहत और खुशी का माहौल है।
पूर्व प्रधान और ग्रामीणों की सराहनीय पहल
खानपुर थाने से बंटी के मिलने की पुष्टि होते ही चौरीचौरा पुलिस ने उनके परिजनों को सूचित किया। इस खबर के मिलते ही गांव के पूर्व प्रधान विनोद कुमार चौधरी और श्यामू पासवान ने मानवता की मिसाल पेश की। वे तत्काल निजी गाड़ी का प्रबंध कर गाजीपुर के लिए रवाना हो गए। गुरुवार को वे खानपुर थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने कागजी कार्यवाही पूरी कर बंटी को उनके सुपुर्द किया। छह साल बाद अपने गांव के व्यक्ति को सुरक्षित देखकर सबकी आंखें भर आईं। यह सफर न केवल दो जिलों के बीच की दूरी का था, बल्कि अपनों से मिलने की उम्मीद का भी था।
माता-पिता का साया उठने के बाद बिगड़ा संतुलन
बंटी पांडेय की निजी जिंदगी काफी त्रासदियों से भरी रही है। घर वापसी के बाद उनके चाचा सत्यप्रकाश पांडेय ने बताया कि बंटी मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं, जिस कारण वे अक्सर अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि बंटी के सिर से माता-पिता का साया बहुत पहले ही उठ चुका था। अभिभावकों के निधन के सदमे और अकेलेपन ने उनकी मानसिक स्थिति को और भी नाजुक बना दिया था। इसी विक्षिप्त अवस्था में वह छह साल पहले अचानक घर से निकल गए थे, जिसके बाद उनका कोई अता-पता नहीं चल रहा था।
गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद हताश था परिवार
जब बंटी छह साल पहले घर से अचानक लापता हुए थे, तो उनके चाचा और परिजनों ने हर संभव जगह उनकी तलाश की थी। रिश्तेदारों के यहां और संभावित स्थानों पर पूछने के बाद, जब कोई सुराग नहीं मिला, तो थक-हारकर परिजनों ने चौरीचौरा थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस रिकॉर्ड में वह लंबी अवधि से लापता सूची में शामिल थे। इतने वर्षों तक कोई खबर न मिलने से परिवार लगभग उम्मीद खो चुका था, लेकिन गाजीपुर पुलिस की सतर्कता और सूचना तंत्र ने इस ठंडे बस्ते में पड़े मामले को सुलझा दिया और बंटी को अपनों के बीच पहुंचा दिया।