गोरखपुर: महानगर की यातायात व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए गोरखपुर ट्रैफिक पुलिस ने एक ऐतिहासिक पहल की है। बुधवार से यातायात विभाग में तैनात 272 होमगार्ड्स और 150 पीआरडी जवानों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है। एसपी ट्रैफिक राजकुमार पाण्डेय के इस फैसले से जवानों की लेटलतीफी पर अंकुश लगेगा। अब समय से ड्यूटी पर न पहुंचने वाले जवानों को गैरहाजिर माना जाएगा, जिससे शहर के प्रमुख चौराहों पर लगने वाले जाम से आम जनता को निजात मिल सकेगी।
प्रदेश में गोरखपुर ट्रैफिक पुलिस की पहली अनूठी पहल
इस नई व्यवस्था के लागू होते ही गोरखपुर की यातायात पुलिस उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी यूनिट बन गई है, जहां होमगार्ड्स और पीआरडी जवानों की ड्यूटी बायोमेट्रिक सिस्टम के जरिए मॉनिटर की जाएगी। अब तक यह व्यवस्था मैनुअल थी, जिसमें देरी से आने पर भी रिकॉर्ड में हेरफेर की गुंजाइश रहती थी। अब यातायात कार्यालय पर मशीन लगने से पारदर्शिता आएगी। एसपी ट्रैफिक के अनुसार, यह तकनीक न केवल जवानों को अनुशासित करेगी, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
दो पालियों में 422 जवानों की होगी सख्त निगरानी
महानगर की सड़कों पर तैनात रहने वाली दो पालियों की फोर्स अब पूरी तरह रडार पर रहेगी। सुबह 7:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे और दोपहर 3:00 बजे से रात 10:00 बजे तक की शिफ्ट में तैनात कुल 422 जवानों को अपनी हाजिरी बायोमेट्रिक मशीन पर दर्ज करानी होगी। अक्सर देखा जाता था कि जवानों के देरी से पहुंचने के कारण चौराहों पर सुबह और दोपहर के समय भारी जाम लग जाता था। इस नई समयबद्धता से ड्यूटी पॉइंट पर जवानों की मौजूदगी सुनिश्चित होगी, जिससे राहगीरों को जाम के झाम से नहीं जूझना पड़ेगा।
भविष्य में अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी लागू होगा नियम
एसपी ट्रैफिक राजकुमार पाण्डेय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस व्यवस्था की शुरुआत होमगार्ड्स और पीआरडी जवानों से की गई है, लेकिन जल्द ही इसका विस्तार विभाग के अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी किया जाएगा। बायोमेट्रिक हाजिरी का मुख्य उद्देश्य विभाग की छवि सुधारना और ड्यूटी के प्रति जवानों को कर्तव्यनिष्ठ बनाना है। अधिकारी का दावा है कि इस डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम से भ्रष्टाचार और अनुपस्थिति की शिकायतों में कमी आएगी। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे जिले के अन्य थानों और चौकियों पर भी लागू करने की योजना बनाई जा सकती है।