गोरखपुर: महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गोरखपुर पुलिस ने एक व्यापक और अनूठी मुहिम छेड़ी है। ‘मिशन-शक्ति फेज–5.0′ के अंतर्गत जिले के सभी थानों में ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। एसएसपी और एसपी क्राइम के निर्देशन में हुई इस पहल ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में आधी आबादी को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का नया पाठ पढ़ाया है, जिसका उद्देश्य महिलाओं में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाना है।
हर थाने में सजी चौपाल, पुलिस ने महिलाओं से किया सीधा संवाद
इस अभियान की सबसे खास बात इसका स्वरूप रहा। पुलिस ने बंद कमरों के बजाय खुले में चौपाल लगाकर महिलाओं और छात्राओं से सीधा संपर्क साधा। सम्मेलन में पुलिस अधिकारियों और महिला बीट कर्मियों ने उपस्थित महिलाओं को शासन की कल्याणकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा। इसका उद्देश्य केवल सुरक्षा का भरोसा देना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के लिए एक भयमुक्त और सशक्त वातावरण तैयार करना था।
दहेज उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी कवच की मिली जानकारी
कार्यक्रम में सिर्फ योजनाओं पर बात नहीं हुई, बल्कि कानूनी अधिकारों को हथियार बनाने पर जोर दिया गया। पुलिस ने घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसे पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ आज के दौर में बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति भी महिलाओं को सचेत किया। बाल अपराधों से जुड़े कानूनों और महिलाओं के पक्ष में मौजूद संवैधानिक प्रावधानों को बहुत ही सरल भाषा में समझाया गया, ताकि वे अपने अधिकारों को जान सकें।
1090 और 112 डायल करें, घर-घर पहुंचा सुरक्षा का नंबर
संकट के समय त्वरित सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबरों को याद कराया गया। वीमेन पावर लाइन (1090), पुलिस आपात सेवा (112) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) की उपयोगिता विस्तार से समझाई गई। पुलिस ने स्पष्ट किया कि शिकायत दर्ज कराना अब जटिल नहीं है। जागरूकता को स्थाई बनाने के लिए अंत में सुरक्षा मंत्र लिखे पंपलेट भी बांटे गए, ताकि महिलाएं जरूरत पड़ने पर बिना किसी संकोच के मदद मांग सकें।