गोरखपुर: गोरखपुर मंडलायुक्त सभागार में बुधवार को ‘फार्मर रजिस्ट्री‘ अभियान को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। लखनऊ से प्रमुख सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़कर स्पष्ट निर्देश दिए कि कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए यह अभियान शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने दो टूक कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर पात्र किसान का पंजीकरण सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ग्राम पंचायतों में लगेंगे समस्या समाधान कैंप
कार्यवाहक जिलाधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने बैठक में एक अनूठी पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनपद में पंजीकरण की गति बढ़ाने के लिए अब सीधे ग्राम पंचायतों में विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य तकनीकी खामियों और अधूरे दस्तावेजों के कारण अटके आवेदनों का मौके पर ही समाधान करना है, ताकि कोई भी किसान महज कागजी कमी की वजह से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होने से वंचित न रह जाए।
राजस्व और कृषि विभाग का संयुक्त ‘टास्क फोर्स’
मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने बैठक में कार्यप्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए राजस्व और कृषि विभाग को अलग-अलग काम करने के बजाय ‘बेहतर समन्वय’ (Better Coordination) के साथ फील्ड में उतरने का आदेश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कार्य केवल एक औपचारिकता या डाटा एंट्री नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर किसानों के भविष्य और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ गंभीर विषय है, इसलिए फील्ड स्तर पर निगरानी अब और सख्त होगी।
प्रमाणिक डाटा से खत्म होगा बिचौलियों का खेल
प्रमुख सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इस प्रोजेक्ट के दूरगामी परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री का असली मकसद किसानों का एक ‘समग्र और प्रमाणिक डाटा’ तैयार करना है। इस डिजिटल डेटाबेस के तैयार होते ही सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या बिचौलिए के सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा, जो प्रदेश की कृषि व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित होगा।