गोरखपुर: गोरखपुर के जटाशंकर स्थित पूज्य माता साहिब आश्रम में रविवार को देशभक्ति का अनूठा रंग देखने को मिला। अमर शहीद हेमू कालानी के बलिदान दिवस (21 जनवरी) की पूर्व संध्या पर सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया (वुमेन्स विंग) ने बच्चों के लिए एक भव्य आर्ट एवं क्राफ्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया। इसमें शहर के नन्हे कलाकारों ने तूलिका और रंगों के माध्यम से आजादी के परवानों की शौर्य गाथाओं को कैनवास पर उतारकर शहादत को नमन किया। यह आयोजन सिंधी समाज द्वारा नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की एक सार्थक पहल साबित हुआ।
पेंटिंग: दोपहर 12 से 2 बजे तक कागज पर उतरे तिरंगे के रंग
दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चले इस दो घंटे के आयोजन में बच्चों की एकाग्रता देखते ही बन रही थी। विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने अपनी कल्पनाओं में तिरंगे के रंग और बलिदान के प्रतीकों को बखूबी पिरोया। बच्चों ने केवल पेंटिंग नहीं बनाई, बल्कि हेमू कालानी के त्याग और साहस को चित्रों के माध्यम से सजीव कर दिया। आयोजन स्थल पर मौजूद अभिभावकों और नागरिकों ने महसूस किया कि यह महज एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बालमन में राष्ट्रीयता के संस्कार रोपने का एक सशक्त माध्यम था। बच्चों की कलाकृतियों में अनुशासन और आत्मविश्वास की झलक साफ दिखाई दे रही थी।
संदेश: नि:शुल्क आयोजन में छाया राय सिंघानी ने कही बड़ी बात
कार्यक्रम की संयोजिका छाया राय सिंघानी ने इस मौके पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शहीदों का स्मरण रस्मी नहीं होना चाहिए, बल्कि यह बच्चों के संस्कारों का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जब बचपन शहादत के मायने समझता है, तभी राष्ट्र की नींव मजबूत होती है। वहीं, महामंत्री देव केसवानी ने जानकारी दी कि यह पूरा आयोजन बच्चों के लिए निःशुल्क रखा गया था ताकि ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उनका उद्देश्य था कि नई पीढ़ी किताबों से इतर कला के जरिए अपने नायकों को पहचाने।
समापन: चित्र पर पुष्प अर्पित कर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
प्रतियोगिता का समापन बेहद भावुक माहौल में हुआ। अंत में सभी उपस्थित जनों, अतिथियों और बच्चों ने अमर शहीद हेमू कालानी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सिंधी समाज की इस पहल को वहां मौजूद बुद्धिजीवियों ने एक अनुकरणीय कदम बताया। नन्हे हाथों द्वारा तैयार की गई कृतियां यह गवाही दे रही थीं कि अगर सही दिशा मिले, तो आज के बच्चे भी अपने इतिहास और बलिदानियों के प्रति गहरी संवेदना रखते हैं। यह कार्यक्रम सामाजिक सहभागिता और राष्ट्रीय चेतना की एक मिसाल बनकर उभरा।