गोरखपुर: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा छात्रों और समाज के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए ‘स्नेह’ (SNEH) नामक ‘हैप्पीनेस एंड होलिस्टिक वेल-बीइंग सेंटर’ स्थापित किया जा रहा है। पीएम-उषा अनुदान के तहत विकसित यह केंद्र बायोफीडबैक तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित मानसिक उपचार प्रदान करेगा।
‘स्नेह’ केंद्र के माध्यम से पोषण, ऊर्जा और उपचार का मिलेगा सुरक्षित स्थान
कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में स्थापित होने वाले इस ‘स्नेह’ (Space to Nurture, Energize and Heal) केंद्र का मुख्य उद्देश्य छात्रों का भावनात्मक सशक्तिकरण है। नैक A++ मान्यता मिलने के बाद, विश्वविद्यालय अब मानसिक स्वास्थ्य और सॉफ्ट स्किल को संस्थागत रूप दे रहा है। यह केंद्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप एक संवेदनशील और उत्तरदायी विश्वविद्यालय मॉडल पेश करेगा।
बायोफीडबैक कक्ष में वैज्ञानिक सेंसरों से मापा जाएगा रीयल-टाइम तनाव स्तर
इस केंद्र की सबसे विशिष्ट सुविधा अत्याधुनिक ‘बायोफीडबैक कक्ष’ है, जहाँ वैज्ञानिक सेंसरों के जरिए हृदयगति और मांसपेशियों के खिंचाव को मापा जाएगा। विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार के अनुसार, यह तकनीक व्यक्ति को रीयल-टाइम में उसके शरीर के भीतर हो रहे जैविक परिवर्तनों को दिखाएगी। इससे तनाव केवल महसूस करने वाली स्थिति न रहकर, एक मापी जा सकने वाली वैज्ञानिक प्रक्रिया बन जाएगी।
विद्यालय, समाज और उद्योग जगत के लिए सक्रिय सेतु बनेगा नया केंद्र
यह सेंटर केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित न रहकर आउटरीच गतिविधियों के जरिए विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और औद्योगिक कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित करेगा। डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. अनुभूति दुबे के अनुसार, कार्यस्थल तनाव (बर्नआउट) और परीक्षा-चिंता के लिए विशेष टेलर-मेड ट्रेनिंग मॉड्यूल्स तैयार किए गए हैं। यह पहल विश्वविद्यालय, समाज और कॉर्पोरेट जगत के बीच एक प्रभावी सेतु का कार्य करेगी।