गोरखपुर: पूर्वांचल के स्वाद को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने वाली है। उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) की तर्ज पर शुरू की गई ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन’ (ODOC) पहल के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को आधिकारिक तौर पर ‘नॉलेज पार्टनर’ नियुक्त किया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग द्वारा लिए गए इस फैसले से गोरखपुर मंडल के पारंपरिक व्यंजनों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और क्वालिटी चेक का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय अब केवल डिग्री बांटने वाला संस्थान नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला केंद्र भी बनेगा।
चार जिलों से चुने जाएंगे कम से कम 2-2 खास व्यंजन
ODOP सेल कानपुर द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, विश्वविद्यालय को विशेष रूप से गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज जनपदों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम इन चारों जिलों का दौरा कर वहां के कम से कम दो ऐसे पारंपरिक खाद्य उत्पादों या व्यंजनों की पहचान करेगी, जिनमें बाजार में छा जाने की क्षमता है। टीम का काम सिर्फ डिश चुनना नहीं होगा, बल्कि वे इन व्यंजनों के गुणवत्ता संवर्धन, फूड सेफ्टी, आधुनिक पैकेजिंग और स्केलेबिलिटी का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
गृह विज्ञान विभाग की प्रो. दिव्या रानी सिंह बनीं नोडल ऑफिसर
इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिम्मेदारी तय कर दी है। गृह विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. दिव्या रानी सिंह को इस प्रोग्राम का नोडल ऑफिसर नामित किया गया है। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह सहभागिता राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की उस भावना के अनुरूप है, जो संस्थानों को सीधे समाज और उद्योग से जोड़ती है। विश्वविद्यालय का शोध अब किताबी न रहकर पूर्वांचल के पारंपरिक व्यंजनों को शोध और गुणवत्ता के मानकों पर परखकर उन्हें बाज़ार के लिए तैयार करेगा।
खानपान के जरिए युवाओं को रोजगार दिलाने का विजन
इस योजना के मूल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह विजन है, जिसमें स्थानीय स्वाद को रोजगार का जरिया बनाना है। सीएम ने स्पष्ट किया है कि जब पारंपरिक व्यंजनों को प्रोफेशनल ब्रांडिंग और ग्लोबल मार्केट मिलेगा, तो स्थानीय स्तर पर युवाओं और उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर सरकार इन उत्पादों को बढ़ावा देगी। यह पहल केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने का एक बड़ा वैज्ञानिक और दीर्घकालिक प्रयास है।