गोरखपुर: भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह सोमवार को गोरखपुर के चौरीचौरा पहुंचे। सन् 1972 के बाद पहली बार यहां आए बृजभूषण अपनी पुरानी यादों को ताजा कर और उस सरजमीं को देखकर बेहद भावुक हो गए। खुद को संभालते हुए हुए उन्होंने चौरीचौरा की तुलना भगवान राम के चित्रकूट और श्रीकृष्ण के वृंदावन से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह ईश्वर के लिए उन धामों का महत्व है, उसी तरह मेरे जीवन में चौरीचौरा का स्थान है।
8वीं में दो बार फेल और नकल से पास होने का किस्सा
अपने बचपन के संघर्षों और पढ़ाई के दिनों को याद करते हुए पूर्व सांसद ने एक बेहद स्पष्ट खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब वह अपने घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे थे, तो कक्षा 8 में दो बार फेल हो गए थे। इसके बाद उन्होंने अपने मामा सर्वदानन्द सिंह से बात की, जो उस समय गन्ना विभाग में पर्यवेक्षक थे, और चौरीचौरा चले आए। यहीं से उनके जीवन की दिशा बदली और उन्होंने बहुत कुछ सीखा।
कोऑपरेटिव के बिना प्लास्टर वाले कमरे में बिताए 4 साल
बृजभूषण सिंह जेबी महाजन डिग्री कॉलेज के सामने स्थित उसी सरकारी भवन (कोऑपरेटिव) में गए, जहां उन्होंने किशोरावस्था के चार साल बिताए थे। उस छोटे से कमरे को देखकर वे भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वह वहां बिना बिजली, पंखा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के रहते थे। वह कमरा तब भी बिना प्लास्टर का था और आज भी वैसा ही वीरान खड़ा है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि इसी कमरे के संघर्ष और चौरीचौरा की धरती की तपिश ने ही ‘बृजभूषण को सोना’ बनाया है।
हेलीकॉप्टर से उतरते ही पुराने मित्र ईश्वरचंद को लगाया गले
अपने निजी हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद बृजभूषण ने सबसे पहले डिग्री कॉलेज के संस्थापक भगवान दास जायसवाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वहां उनके बचपन के सबसे करीबी मित्र व पूर्व ब्लॉक प्रमुख ईश्वरचंद जायसवाल, विशाल जायसवाल और मुन्ना भुज ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों को समय की कीमत समझने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि चौरीचौरा के क्रांतिकारियों और यहां के माहौल ने उन्हें अच्छे और बुरे की पहचान करना सिखाया है।