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डीडीयू में भारतीय भाषाओं के भविष्य पर महामंथन, 22 जनवरी से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज

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गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के बौद्धिक विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है। विश्वविद्यालय के महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ शोधपीठ में 22 जनवरी से ‘भारतीय भाषा परिवार’ पर केंद्रित दो दिवसीय भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू होने जा रही है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार और डीडीयू के कला संकाय के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे इस आयोजन में देशभर के प्रख्यात विद्वान, वरिष्ठ प्राध्यापक और शोधार्थी हिस्सा लेंगे। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं को केवल बातचीत का माध्यम न मानकर, उन्हें राष्ट्रीय चेतना और बौद्धिक आत्मनिर्भरता के सशक्त आधार के रूप में स्थापित करना है।

दो महत्वपूर्ण शोधग्रंथों का विमोचन और पैनल चर्चा

उद्घाटन सत्र 22 जनवरी को कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में आयोजित होगा, जिसमें एक विशेष अकादमिक उपलब्धि को रेखांकित किया जाएगा। इस सत्र की सबसे बड़ी खासियत भारतीय भाषा परिवार पर तैयार किए गए दो विशिष्ट शोधग्रंथों का लोकार्पण है। संयोजक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि लोकार्पण के तत्काल बाद इन पुस्तकों पर विशेषज्ञों की उपस्थिति में एक ‘पैनल चर्चा’ भी होगी। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एस.पी.एम. त्रिपाठी और मुख्य वक्ता के तौर पर ईएफएलयू के प्रो. रजनीश अरोड़ा मौजूद रहेंगे।

ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन मोड में भी जुड़ेंगे शोधार्थी

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाया गया है। अकादमिक और तकनीकी सत्र केवल सभागार में बैठे लोगों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से भी देशभर के शोधार्थी अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर सकेंगे। इस दौरान भाषा-नीति, अनुवाद परंपरा और लोकभाषाओं की मौजूदा स्थिति पर गंभीर मंथन होगा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रो. अवधेश कुमार जैसे विशेषज्ञ यह बताएंगे कि तकनीक और प्रशासन के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं की भूमिका कैसे सुदृढ़ हो रही है। यह आयोजन अकादमिक जगत को नई दिशा देने वाला साबित होगा।

एनसीईआरटी और इलाहाबाद विवि के विशेषज्ञों का मिलेगा मार्गदर्शन

संगोष्ठी का समापन 23 जनवरी को प्रति-कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी की अध्यक्षता में होगा, जिसमें एनसीईआरटी, नई दिल्ली और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शीर्ष विशेषज्ञ निष्कर्ष प्रस्तुत करेंगे। समापन सत्र में एनसीईआरटी के प्रो. ब्रज मोहन और इलाहाबाद विवि के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र भावी पाठ्यक्रम विकास पर चर्चा करेंगे। प्रो. अजय कुमार शुक्ल के अनुसार, यह आयोजन भाषिक विविधता के बीच राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की एक सशक्त पहल है। दो दिनों तक चलने वाले इस विमर्श के अंत में प्रमाण-पत्र वितरण के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया जाएगा।

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Siddhartha Srivastava का दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा जैसे समाचार पत्रों में लोकल से लेकर नेशनल डेस्क तक 18 वर्ष का कार्य अनुभव. गत पांच वर्षों से डिज़िटल पत्रकारिता | संपर्क: 9871159904

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