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गोरखपुर न्यूज़: राज्य कर्मचारियों ने भरी हुंकार, मांगें पूरी न होने पर करेंगे बड़ा आंदोलन

गोरखपुर न्यूज़: राज्य कर्मचारियों ने भरी हुंकार, मांगें पूरी न होने पर करेंगे बड़ा आंदोलन

गोरखपुर: राज्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारी नेता रूपेश कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में 18 जनवरी को हुई एक अहम बैठक में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर वर्ष 2026 से पूर्व वेतन, पेंशन और भत्तों से जुड़ी विसंगतियों का समाधान नहीं हुआ, तो सरकार को व्यापक आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। संगठनों का आरोप है कि सरकारी घोषणाएं महज फाइलों में दबी हैं और मैदानी हकीकत सिफर है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि अब वे आश्वासनों से नहीं मानेंगे, बल्कि ठोस निर्णय चाहते हैं।

वेतन विसंगति: 50% डीए को मूल वेतन में जोड़ने की फाइल धूल फांक रही

कर्मचारी संगठनों ने दो टूक कहा है कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के बिना उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। एनपीएस और यूपीएस कर्मचारियों के हितों की रक्षा में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। सबसे बड़ी नाराजगी महंगाई भत्ते (DA) को लेकर है। महंगाई के इस दौर में 50 प्रतिशत डीए को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग वर्षों से लटकी हुई है, जिस पर सरकार ध्यान नहीं दे रही। इसके अलावा 60, 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर मिलने वाली सुविधाओं के क्रियान्वयन में अस्पष्टता होने से बुजुर्ग कर्मचारियों में भारी रोष है।

‘अस्पतालों में कैशलेस कार्ड बेकार, नकद पैसे मांग रहे डॉक्टर’

बैठक में सरकार की महत्वाकांक्षी ‘दीनदयाल कैशलेस इलाज योजना’ की पोल खोली गई। नेताओं ने आरोप लगाया कि यह योजना ‘सुरक्षा कवच’ के बजाय बोझ बन गई है। पैनल में शामिल कई निजी अस्पताल कार्ड होने के बावजूद कैशलेस इलाज देने से साफ मना कर देते हैं और मरीज से नकद वसूली करते हैं। गंभीर बीमारी की स्थिति में कर्मचारियों को अपनी जेब से भुगतान करना पड़ रहा है। बाद में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए उन्हें महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे वे आर्थिक और मानसिक रूप से टूट रहे हैं।

एसीपी और पदोन्नति के लिए भी काटने पड़ रहे चक्कर

केवल पैसा ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी कर्मचारियों की उपेक्षा हो रही है। बैठक में बताया गया कि एसीपी, पदोन्नति और आवास आवंटन जैसे मामलों में अफसरों की उदासीनता लगातार बनी हुई है। नियमों का सही अनुपालन न होने से कर्मचारियों का करियर प्रभावित हो रहा है। इस मौके पर मदन मुरारी शुक्ल, पंडित श्याम नारायण शुक्ल, राजेश सिंह, इंजीनियर सौरभ श्रीवास्तव और अनिल द्विवेदी समेत कई नेताओं ने हुंकार भरी कि अगर स्वास्थ्य नीतियों और सेवा शर्तों में तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो कर्मचारी संगठित संघर्ष के लिए बाध्य होंगे।

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Jagdish Lal

Jagdish Lal

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हिंदी पत्रकारिता से करीब चार दशकों तक सक्रिय जुड़ाव. संप्रति: लेखन, पठन-पाठन.

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