गोरखपुर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के जनरल सर्जरी विभाग में 62 वर्षीय एक महिला मरीज का अत्यंत जटिल और जीवनरक्षक ‘व्हिपल्स ऑपरेशन’ सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। पैंक्रियाज के पेरिअम्पुलरी कार्सिनोमा (कैंसर) से जूझ रही इस महिला के लिए यह सर्जरी मुख्यमंत्री राहत कोष से प्राप्त आर्थिक सहायता के कारण संभव हो पाई। एम्स प्रबंधन के अनुसार, यह सरकारी योजना आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर रोगियों के लिए संजीवनी साबित हो रही है, जिससे अब महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम हुई है।
मुख्यमंत्री राहत कोष से मिली वित्तीय संजीवनी
मरीज पिछले पांच महीनों से पीलिया और पेट दर्द से परेशान थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का महंगा ऑपरेशन कराने में असमर्थ थे। एम्स के डॉ. धर्मेन्द्र कुमार पिपल ने परिवार की स्थिति को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता लेने का सुझाव दिया। सरकारी मंजूरी और बजट मिलने के बाद ही इस उच्च स्तरीय सर्जरी की प्रक्रिया शुरू की गई, जो गरीब परिवारों के लिए एम्स गोरखपुर को एक बड़े सहारा के रूप में स्थापित करती है।
शरीर के भीतर नई एनास्टोमोसिस का निर्माण
व्हिपल्स ऑपरेशन को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण सर्जिकल प्रक्रियाओं में गिना जाता है। इस जटिल सर्जरी के दौरान पैंक्रियाज (अग्न्याशय) के एक हिस्से के साथ पित्त की नली, डुओडेनम और पित्ताशय को शरीर से बाहर निकाला जाता है। इसके बाद सर्जन शरीर के भीतर अंगों को जोड़ने के लिए एक नई ‘एनास्टोमोसिस’ तैयार करते हैं। चूंकि यह ऑपरेशन अत्यंत नाजुक रक्तवाहिकाओं के पास होता है, इसलिए इसमें आधुनिक एनर्जी उपकरणों और उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल की आवश्यकता होती है, जो अब एम्स गोरखपुर में नियमित रूप से उपलब्ध है।
मल्टीडिसिप्लिनरी टीम और विशेषज्ञों का समन्वय
इस सफल ऑपरेशन को डॉ. धर्मेन्द्र कुमार पिपल और डॉ. गौरव गुप्ता के नेतृत्व में एक विस्तृत मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने अंजाम दिया। इसमें गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, रेडियोथेरेपी विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने सर्जरी से पहले मरीज का कार्डियक व पल्मोनरी मूल्यांकन किया ताकि जोखिम को न्यूनतम रखा जा सके। एम्स गोरखपुर में अब तक 6 से 7 सफल व्हिपल्स ऑपरेशन किए जा चुके हैं, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के कैंसर मरीजों को अब लखनऊ या दिल्ली जाने की मजबूरी से राहत मिली है।