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रेलवे का बड़ा फैसला: अब 10 करोड़ टर्नओवर की शर्त खत्म, पार्सल बिजनेस करना हुआ आसान

रेलवे का बड़ा फैसला: अब 10 करोड़ टर्नओवर की शर्त खत्म, पार्सल बिजनेस करना हुआ आसान

गोरखपुर: भारतीय रेलवे ने पार्सल कारोबार को नई रफ्तार देने के लिए अपनी नीतियों में ऐतिहासिक बदलाव किया है। पूर्वोत्तर रेलवे (NER) ने छोटे व्यापारियों और किसानों को बड़ी राहत देते हुए एग्रीगेटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन और टेंडर प्रक्रिया की जटिल वित्तीय शर्तों को हटा दिया है। इस बदलाव का सीधा मकसद एंट्री बैरियर्स को खत्म करना है, ताकि अब आम लोग और छोटे उद्यमी भी आसानी से रेलवे के साथ बिजनेस कर सकें।

रजिस्ट्रेशन फीस 20 हजार से घटाकर 10 हजार रुपये हुई

जो व्यापारी या किसान फ्रेट फॉरवर्डर्स और ट्रांसपोर्टर्स को एग्रीगेटर्स के रूप में शामिल करना चाहते हैं, उनकी जेब को बड़ी राहत मिली है। रेलवे ने इनकी एम्पैनलमेंट फीस को 20,000 रुपये से घटाकर सीधे आधा, यानी 10,000 रुपये (प्लस जीएसटी) कर दिया है। प्रशासन का मानना है कि शुल्क कम होने से अधिक से अधिक संख्या में लोग अपना पंजीकरण कराएंगे और पार्सल सेवाओं का लाभ उठाएंगे।

टेंडर के लिए अब 10 करोड़ के टर्नओवर की जरूरत नहीं

पार्सल कार्गो एक्सप्रेस ट्रेन (PCET) के संचालन के लिए पात्रता नियमों में सबसे बड़ा सुधार किया गया है। पहले टेंडर में भाग लेने के लिए रजिस्टर्ड लीजहोल्डर का पिछले तीन साल में 10 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर अनिवार्य था, जिसे अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इस सीमा के हटने से अब सभी रजिस्टर्ड लीजहोल्डर्स ओपन टेंडर प्रक्रिया में बेहिचक हिस्सा ले सकेंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

रैपिड कार्गो सर्विस से 50 लाख की बाध्यता भी हटी

पार्सल स्पेस लीजिंग की ई-नीलामी के लिए अब बैलेंस शीट और प्रॉफिट-लॉस जैसे दस्तावेजों की उलझन नहीं रहेगी। जॉइंट पार्सल प्रोडक्ट-रैपिड कार्गो सर्विस के तहत लॉजिस्टिक बिजनेस के लिए जरूरी 50 लाख रुपये के नेट टर्नओवर की शर्त को भी हटा दिया गया है। इन पुराने एंट्री बैरियर्स (रुकावटों) के हटने से पार्सल बिजनेस में सुधार होगा और कार्गो हैंडलिंग प्रक्रिया सरल हो जाएगी।


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Siddhartha Srivastava का दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा जैसे समाचार पत्रों में लोकल से लेकर नेशनल डेस्क तक 18 वर्ष का कार्य अनुभव. गत पांच वर्षों से डिज़िटल पत्रकारिता | संपर्क: 9871159904

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