गोरखपुर: एम्स गोरखपुर ने सामुदायिक स्वास्थ्य को नई दिशा देते हुए अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘मेध्यावृद्धि’ (MedhyaVridhi) का दायरा बढ़ा दिया है। अब चरगावां और भटहट ब्लॉक के 7 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बुजुर्गों की दिमागी और शारीरिक सेहत को संवारा जाएगा। इस अभियान की औपचारिक शुरुआत हरसेवकपुर सेंटर से डीन (रिसर्च) की मौजूदगी में हुई, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है।
मधुमेह और बीपी की जांच के साथ ‘ब्रेन गेम्स’ से सुधरेगी याददाश्त
कार्यक्रम में संज्ञानात्मक क्षीणता (Cognitive Impairment) के जोखिम वाले लोगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि योग, डाइट काउंसलिंग और विटामिन सप्लीमेंट्स भी दिए गए। डॉ. आनंद मोहन दीक्षित के अनुसार, जीवनशैली में बदलाव और सही पोषण से बुजुर्गों में होने वाली दिमागी कमजोरी को समय रहते रोका जा सकता है। इसके लिए प्रतिभागियों को विशेष ‘कॉग्निटिव गेम्स’ भी खिलाए गए।
ठंड से बचाव के लिए बांटे गए 214 कंबल, दिखाई सेवा भावना
चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ एम्स ने सामाजिक सरोकार की मिसाल भी पेश की है। कड़ाके की ठंड को देखते हुए ‘मेध्यावृद्धि’ टीम ने अध्ययन में शामिल जरूरतमंद प्रतिभागियों को 214 कंबल वितरित किए। संस्थान का उद्देश्य केवल दवा देना नहीं, बल्कि ‘कर्मयोगी’ बनकर समुदाय की हर जरूरत का ख्याल रखना है, ताकि समावेशी और समुदाय-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो सके।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स पर अब मिलेगी एकीकृत बुजुर्ग देखभाल
डॉ. यू. वेंकटेश ने बताया कि एचडब्ल्यूसी (HWC) के जरिए अब गांव-गांव तक बुजुर्गों के लिए विशेष देखभाल पहुंचेगी। डीन (रिसर्च) ने जोर दिया कि प्राथमिक स्तर पर ही स्क्रीनिंग और वेलनेस गतिविधियों को एकीकृत कर गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है। यह पहल समुदाय को लंबी उम्र तक स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए सशक्त करेगी।