Go Gorakhpur: रामगढ़ झील में जल्द ही लोग कश्मीर की डल झील में चलने वाली शिकारा और गोवा में चलने वाली मिनी क्रूज का लुत्फ़ उठा सकेंगे. ये नावें बाहर से नहीं आएंगी बल्कि गोरखपुर में ही बनाई जाएंगी. पर्यटन विभाग की तरफ से संचालित साहनी नौकायान समिति ने वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट में नावों का निर्माण शुरू करा दिया है. शिकारा और क्रूज की खास बात यह होगी कि शाम के वक्त ये सौर ऊर्जा से जगमगाएंगी भी. इन नावों को कोलकाता के कुशल कारीगर मूर्त रूप देने में जुटे हुए हैं.
नौकायान समिति के अध्यक्ष राधेश्याम साहनी ने मीडिया को बताया कि काम काफी तेजी से चल रहा है. चूंकि हम अपने सामने ही नाव बनवा रहे हैं, ऐसे में इसकी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान दे रहे हैं. रामगढ़ झील पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बोटिंग की व्यवस्था की गई है. यहां आने वाले लोगों को पहले से ही सामान्य बोटिंग और जेट्टी पर स्पीड बोटिंग की सुविधा दी गई है. क्रूज शुरू हो जाने से यहां और भी पर्यटक आकर्षित होंगे. गोरखपुर में बन रहा क्रूज साइज में छोटा है लेकिन उसमें सभी सुविधाएं हैं.
शिकारा नाव की विशेषताः शिकारा एक प्रकार की लकड़ी की नाव है जो मुख्यतः श्रीनगर की डल झील में प्रयोग में लाई जाती है. जम्मू कश्मीर के अलावा शिकारे जैसी नावें केरल में भी प्रयोग की जाती है. शिकारे विभिन्न आकार में बनाए जाते हैं और लोगों के परिवहन सहित अन्य कई उद्देश्यों के लिए उपयोग में आते हैं.
नौकायन रोड होगा अतिक्रमण और जाम से मुक्त : पैडलेगंज, सर्किट हाउस से नौकायन रोड को अतिक्रमण और जाम से मुक्त करने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने योजना बनाई है. नौकायन केंद्र के पास डिवाइडर तोड़ कर जहां गोल चक्कर का निर्माण होगा, वहीं स्ट्रीट फूड वेंडर को पार्क में शिफ्ट किया जाएगा. गोल चक्कर बन जाने से गाड़ियों के यू-टर्न लेने पर जाम नहीं लगेगा बल्कि आवागमन सहज हो जाएगा. नौकायन से चंपा देवी पार्क तक सड़क के सर्किट हाउस की ओर लगने वाली स्ट्रीट फूड की दुकानें दिग्विजयनाथ पार्क और पाकिंग के बीच में बने त्रिकोणीय पार्क में स्थानांतरित की जाएंगी. पिछले दिनों जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिह तंवर ने अधिकारियों के साथ निरीक्षण कर जायजा भी लिया है.
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