गोरखपुर: गोरखपुर जिले की सभी 9 विधानसभा सीटों पर रविवार को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत बूथों पर जबरदस्त गहमागहमी रही। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर आयोजित इस विशेष कैंप में नए मतदाता बनने को लेकर खासा उत्साह दिखा। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीएम दीपक मीणा ने बताया कि रविवार को जिले भर में कुल 18,334 लोगों ने नया वोटर बनने के लिए फॉर्म-6 भरा है। सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक बीएलओ अपने बूथों पर डटे रहे और लोगों की आपत्तियां और आवेदन स्वीकार किए।
आंकड़े: फॉर्म-6 के लिए 18 हजार तो सुधार के लिए आए 2663 आवेदन
प्रशासन द्वारा रविवार देर शाम जारी आंकड़ों के मुताबिक, केवल नए नाम जोड़ने ही नहीं, बल्कि त्रुटि सुधार और नाम काटने के लिए भी अच्छी खासी संख्या में आवेदन आए। जहां 18,334 युवाओं और नागरिकों ने फॉर्म-6 (नया नाम) जमा किया, वहीं वोटर आईडी में गलती सुधारने के लिए 2,663 लोगों ने फॉर्म-8 भरा। इसके अलावा, वोटर लिस्ट से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 के तहत कुल 761 आवेदन प्राप्त हुए। यह पूरा अभियान 1 जनवरी 2026 को अर्हता तिथि मानकर चलाया जा रहा है।
Read…गोरखपुर एम्स: 2 साल के बच्चे की नाक में उगा था दांत, डॉक्टरों ने सर्जरी कर निकाला
प्रक्रिया: बीएलओ ने सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाई शिफ्टेड और मृतक वोटरों की सूची
इस विशेष अभियान में पारदर्शिता सबसे अहम पहलू रही। बीएलओ ने बूथों पर पहुंचकर न केवल फॉर्म जमा किए, बल्कि 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित निर्वाचक नामावली की आलेख्य सूची को उपस्थित लोगों के सामने पढ़कर सुनाया। खास तौर पर ‘एब्सेंट, शिफ्टेड और डेड’ यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृतक मतदाताओं की सूची को सार्वजनिक रूप से पढ़ा गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि फर्जी वोटरों के नाम हटाए जा सकें और सूची को पूरी तरह शुद्ध व पारदर्शी बनाया जा सके।
दायरा: कैम्पियरगंज से चिल्लूपार तक सभी 9 विधानसभाओं में एक साथ चला अभियान
यह विशेष अभियान जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों—320-कैम्पियरगंज, 321-पिपराइच, 322-गोरखपुर शहर, 323-गोरखपुर ग्रामीण, 324-सहजनवां, 325-खजनी (एससी), 326-चौरीचौरा, 327-बांसगांव (एससी) और 328-चिल्लूपार—में एक साथ चलाया गया। डीएम ने स्पष्ट किया कि जिन पात्र लोगों ने आज फॉर्म जमा किए हैं, नियमानुसार जांच के बाद उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर लिए जाएंगे। प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।