गोरखपुर: मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध खिचड़ी मेले को लेकर नगर निगम प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मंगलवार को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें मेले को स्वच्छ, सुरक्षित और जनसुविधाजनक बनाने का खाका खींचा गया। महापौर ने बैठक में दो टूक कहा कि मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत है, इसलिए श्रद्धालुओं की सुविधाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रकाश, पार्किंग और सफाई व्यवस्था को समय से पूर्व चाक-चौबंद करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
कंट्रोल रूम नंबर 8810709390 जारी
बैठक के दौरान शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया। महापौर ने महाप्रबंधक जलकल को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों के चलते जहां भी नगर निगम की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो रही है, उसे तत्काल ठीक कराया जाए। साथ ही सभी ओवरहेड टैंकों के क्लोरीनेशन के आदेश दिए गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि महापौर ने जनता के लिए एक डायरेक्ट लाइन खोली है। उन्होंने अपील की है कि कहीं भी लीकेज दिखे तो तत्काल नगर निगम के कंट्रोल रूम नंबर 8810709390 पर सूचना दें, ताकि टीम मौके पर पहुंचकर मरम्मत कर सके।
रैन बसेरों और मेला क्षेत्र में मिलेगा गर्म पानी
कड़ाके की ठंड और शीतलहर को देखते हुए महापौर ने महानगरवासियों को राहत देने के लिए ‘वॉर्म प्लान’ तैयार किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि खिचड़ी मेला क्षेत्र के अलावा रैन बसेरों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर अलाव की 24 घंटे व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। केवल अलाव ही नहीं, बल्कि रैन बसेरों में ठहरने वालों के लिए गर्म पेयजल का इंतजाम भी अनिवार्य कर दिया गया है। महापौर ने विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों को ठंड से बचाने के लिए जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण अभियान में तेजी लाने को कहा है।
नगर आयुक्तकी मौजूदगी में बनी रणनीति
इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा और महाप्रबंधक जलकल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में तय किया गया कि मेला अवधि के दौरान किसी भी समस्या का ‘त्वरित समाधान’ किया जाएगा। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की हिदायत दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने एसी कमरों से बाहर निकलें और नियमित रूप से मेला परिसर व रैन बसेरों का निरीक्षण करें, ताकि जमीनी हकीकत का पता चलता रहे।