गोरखपुर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर में चिकित्सा जगत का एक बेहद दुर्लभ और जटिल मामला सामने आया है। यहां डॉक्टरों ने बिहार के भोजपुर निवासी महज दो साल के एक मासूम की नाक के अंदर से सर्जरी कर दांत निकाला है। बच्चा जन्म से ही कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) की समस्या से जूझ रहा था, लेकिन नाक में दांत उगने (एक्टोपिक टूथ) के कारण उसे सांस लेने में भारी तकलीफ और दर्द हो रहा था। दंत रोग विभाग के मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. शैलेश कुमार और उनकी टीम ने इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर बच्चे को नई जिंदगी दी है।
भोजपुर के परिवार ने दिल्ली में पढ़ी थी एम्स की सफलता की खबर
बच्चे को लगातार नाक से पानी आने और जबड़े में दर्द की शिकायत थी। परिजन उसे कई अस्पतालों में ले गए, लेकिन सही इलाज नहीं मिल पा रहा था। दरअसल, पांच महीने पहले एम्स में ऐसे ही एक सफल ऑपरेशन की खबर पढ़कर, दिल्ली में रह रहे बच्चे के परिजनों को उम्मीद जगी और उन्होंने एम्स गोरखपुर से संपर्क किया। सीटी स्कैन में पुष्टि हुई कि यह एक ‘एक्टोपिक टूथ’ का मामला है। यह दांत नाक के रास्ते में रुकावट पैदा कर रहा था, जिससे भविष्य में गंभीर संक्रमण और चेहरे के विकास में बाधा आने का खतरा था।
मासूम को बेहोश करने के लिए जुटाने पड़े थे विशेष उपकरण
एम्स निदेशक डॉ. विभा दत्ता के निर्देशन में सर्जरी की विस्तृत योजना बनाई गई। डॉ. शैलेश ने बताया कि क्लेफ्ट लिप और इतनी कम उम्र के बच्चे को एनेस्थीसिया (बेहोशी) देना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. डॉ. संतोष शर्मा और डॉ. विजेता वाजपई ने विशेष उपकरणों और गहन तैयारी का सहारा लिया। डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. प्रियंका त्रिपाठी और नर्सिंग टीम के सहयोग से नाक के अंदर मौजूद दांत को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे सांस लेने में कोई तकलीफ नहीं है।
प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित होगी इस सर्जरी की रिपोर्ट
यह मामला इतना विरल है कि इसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की तैयारी चल रही है। डॉक्टरों के अनुसार, कम उम्र में ऑपरेशन होने से बच्चे को भविष्य में होने वाली चेहरे की कुरूपता और मानसिक दुष्प्रभावों से बचा लिया गया है। पूर्वांचल और गोरखपुर एम्स में इतनी कम उम्र के बच्चे में ऐसा विचित्र ऑपरेशन पहली बार हुआ है। पहले ऐसे जटिल मामलों के लिए मरीजों को दिल्ली या लखनऊ जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुपरस्पेशियलिटी सुविधा गोरखपुर में ही उपलब्ध है।