गोरखपुर: गोरखपुर में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। गोरखनाथ थाना क्षेत्र में एक अधिवक्ता के बुजुर्ग पिता के साथ दिनदहाड़े हुई लूट की घटना के एक सप्ताह बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। मुकामी पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से नाराज होकर अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार को पीड़ित अधिवक्ता आशुतोष के नेतृत्व में वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस ऑफिस पहुंचकर एसएसपी डॉ. राजकरन नैय्यर से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपकर जल्द खुलासे की मांग की।
‘प्रणाम’ कर कार में बैठाया और बातों में उलझाया
पुलिस ऑफिस के बाहर मीडिया से बात करते हुए अधिवक्ता आशुतोष ने वारदात का तरीका बताया। उन्होंने बताया कि घटना बीते 12 जनवरी की दोपहर करीब ढाई बजे की है। उनके पिता जयराम शुक्ला धर्मशाला से ऑटो से आकर चंद्रा पेट्रोल पंप के पास उतरे थे। जैसे ही वह घर जाने के लिए माधव गली की तरफ बढ़े, बरगरवा की ओर से एक सफेद रंग की कार आई। कार सवार अज्ञात लोगों ने पहले उन्हें रोककर ‘प्रणाम’ किया और फिर अपनी बातों के जाल में फंसाकर कार में बैठा लिया।
सोने की अंगूठी-नकदी लूटी और धक्का देकर फरार
कार में बैठाने के बाद बदमाशों ने बुजुर्ग के साथ अभद्रता शुरू कर दी। अधिवक्ता के मुताबिक, कार सवार लुटेरों ने उनके पिता के हाथ से सोने की अंगूठी उतरवा ली और उनके पास रखे लगभग 2500 रुपये नकद भी लूट लिए। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाशों ने मानवता को शर्मसार करते हुए बुजुर्ग को चलती कार से धक्का दे दिया और जिस दिशा से आए थे, उसी ओर तेजी से फरार हो गए। यह पूरी घटना शहर के व्यस्त इलाके में हुई, जो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
डायल 112 और थाने की दौड़ के बाद भी नतीजा सिफर
हैरानी की बात यह है कि घटना के तत्काल बाद पीड़ित ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी थी। इसके बाद परिवार के लोगों के साथ गोरखनाथ थाने पहुंचकर लिखित तहरीर भी दी गई। अधिवक्ता आशुतोष का आरोप है कि एफआईआर और शिकायत के बावजूद मुकामी पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। सात दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो सीसीटीवी खंगाल पाई और न ही बदमाशों का कोई सुराग लगा सकी है, जिसके चलते वकीलों को एसएसपी के पास आना पड़ा।