गोरखपुर: जंगल सिकरी और खोराबार क्षेत्र के आक्रोशित निवासियों और किसानों ने रविवार को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय नारायण मिश्रा के नेतृत्व में जीडीए के निर्माणाधीन स्थल पर एकत्र हुए सैकड़ों लोगों ने अपने मकानों के मालिकाना हक और अधिग्रहित जमीन के उचित मुआवजे की मांग बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकारी उन्हें पिछले कई महीनों से टाल रहे हैं, जिससे अब उनका सब्र जवाब दे गया है।
एनेक्सी भवन में हुई बैठक में सीएम ने दिया था 15 दिन का अल्टीमेटम
पीड़ितों ने जुलाई 2023 में हुई उस उच्च स्तरीय बैठक का हवाला दिया, जो एनेक्सी भवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई थी। करीब 45 मिनट तक चली इस बैठक में जीडीए और प्रशासन के सभी शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उस वक्त सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देशित किया था कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों को डिस्टर्ब न किया जाए और मकान मालिकों को महज 15 दिनों के भीतर मालिकाना हक सौंप दिया जाए, लेकिन यह आदेश आज तक फाइलों में दबा हुआ है।
जनता दरबार से अधिकारियों की चौखट तक, दो साल से जारी है भटकने का दौर
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गुहार लगाने से लेकर हर जिम्मेदार अधिकारी का दरवाजा खटखटाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। काश्तकारों की शिकायत है कि जमीन का उचित मुआवजा न मिलने के कारण वे दूसरी जगह जमीन खरीदने में असमर्थ हैं। जीडीए के अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में प्रशासन के प्रति गहरा अविश्वास पैदा हो गया है।
पाई-पाई जोड़कर बनाए पक्के मकानों पर लटकी जीडीए के बुलडोजर की तलवार
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने किसी तरह पाई-पाई जोड़कर पक्के मकान बनाए थे, लेकिन अब उन्हें नहीं पता कि जीडीए कब उन पर कार्रवाई कर दे या तोड़फोड़ शुरू कर दे। इस अनिश्चितता ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है। रविवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन में राजमंगल राय, मणिकांत शाही, विकास पांडेय, पूनम सिंह, कुसुम शर्मा और शशिकला विश्वकर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करते नजर आए।