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जानकर हैरान होंगे आप, गोरखपुर में मिल चुके हैं इतने फर्जी शिक्षक

गोरखपुर जिले में, कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों की संख्या 87 हो गई है. ताजा मामला भटहट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रामपुर बुजुर्ग में कार्यरत एक सहायक अध्यापिका का है. वह इस विद्यालय में पिछले 12 वर्षों से पढ़ा रही थी. एसटीएफ को शिकायत मिली थी कि शिक्षिका के शैक्षिक दस्तावेज कूटरचित हैं. जांच में यह मामला भी सही पाया गया. एसटीएफ ने जांच रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को सौंपकर कार्यवाही का निर्देश दिया है. विभाग ने शिक्षिका की बर्खास्तगी की कार्यवाही शुरू कर दी है.
File photo of primary school

Go Gorakhpur : गोरखपुर जिले में, कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों की संख्या 87 हो गई है. ताजा मामला भटहट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रामपुर बुजुर्ग में कार्यरत एक सहायक अध्यापिका का है. वह इस विद्यालय में पिछले 12 वर्षों से पढ़ा रही थी. एसटीएफ को शिकायत मिली थी कि शिक्षिका के शैक्षिक दस्तावेज कूटरचित हैं. जांच में यह मामला भी सही पाया गया. एसटीएफ ने जांच रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को सौंपकर कार्यवाही का निर्देश दिया है. विभाग ने शिक्षिका की बर्खास्तगी की कार्यवाही शुरू कर दी है.
एसटीएफ को शिक्षिका ममता कुमारी के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने की शिकायत मिली थी. जांच के दौरान शिक्षिका की ओर से विभाग को दिए गए उसके शैक्षिक दस्तावेज फर्जी मिले. बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कूटरचित दस्तावेजों के सहारे जिले के परिषदीय विद्यालयों में नौकरी हासिल करने वाले 86 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है. बीएसए आरके सिंह ने इस बारे में मीडिया को बताया कि कूटरचित दस्तावेज के सारे कार्यरत शिक्षिका की जांच रिपोर्ट एसटीएफ की ओर से विभाग को मिली है. शिक्षिका को बर्खास्त किया जाएगा. इसके लिए कार्रवाई चल रही है. 
गौरतलब है कि गोरखपुर जनपद में फ़र्ज़ी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों पर पहली बड़ी कार्रवाई साल 2020 में हुई थी. मार्च 2020 में तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने ऐसे 40 शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए राजघाट थाने में तहरीर दी थी. तब विभाग का अनुमान था कि इन 40 फर्जी शिक्षकों पर विभाग ने वेतन के मद में करीब 20 करोड़ रुपए खर्च किए थे. 
साल 2020 के जुलाई महीने में तीन और शिक्षक बर्खास्त किए गए. फिर सितंबर 2020 में फर्जीवाड़ा करने वाले 4 और शिक्षकों को बर्खास्त किया गया. नवंबर 2020 में इस सूची में दो शिक्षिकाएं शामिल हुईं. दिसंबर 2021 में तीन और फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई की गई थी. कोविड के दौरान इस प्रक्रिया में थोड़ी शिथिलता आई, लेकिन अब कार्रवाई ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है. इसके बाद एसटीएफ ने एक-एक करके फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाले कई शिक्षकों को बेनकाब किया है. विभागीय सूत्रों का मानना है कि फर्जी शिक्षकों की संख्या 100 के पार जा सकती है. 
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